दादा कोंडके शायरी

दादा कोंडके शायरी: मांगता हूँ तो देती नहीं हो, जवाब मेरी बात का..!! और देती हो तो खड़ा हो जाता है, रोम-रोम जज्बात का..  मूह में लेना तुम्हे पसंद नहीं, एक भी कतरा शराब का.. फिर क्यूँ बोलती हो के धीरे से डालो, बालों में फूल गुलाब का….. वोह सोती रही में करता रहा,