Nice Hindi Poem: बैठ जाता हूं मिट्टी पे अक्सर

बैठ जाता हूं मिट्टी पे अक्सर… क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है.. मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा, चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना ।। चाहता तो हु की ये दुनिया बदल दू पर दो वक़्त की रोटी के जुगाड़ में फुर्सत नहीं मिलती दोस्तों महँगी से महँगी घड़ी पहन