जाने क्यूं…

जाने क्यूं अब शर्म से, चेहरे गुलाब नही होते। जाने क्यूं अब मस्त मौला मिजाज नही होते। पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें। जाने क्यूं अब चेहरे, खुली किताब नही होते। सुना है बिन कहे दिल की बात समझ लेते थे। गले लगते ही दोस्त हालात समझ लेते थे। जब ना फेस बुक